Urad Seed
Urad Seed
उड़द की उन्नत “पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज़” ( भारत केसरकारी/ICAR संस्थानो के अनुसर )
1) उपयुक्त भूमि व तैयारी
- भुरभुरी, समतल, खरपतवार-रहित तथा अच्छे जल-निकास वाली भूमि सर्वोत्तम।
- खेत में पानी न रुके — जल निकास की उचित व्यवस्था जरूरी।
2) बुवाई का समय
खरीफ (मुख्य):- मानसून आते ही बुवाई करें।
- जून अंत से मध्य जुलाई सर्वोत्तम।
- मानसून देर हो तो जुलाई अंत / अगस्त प्रथम पखवाड़ा तक संभव।
- गेहूँ के बाद सिंचाई उपलब्ध हो तो मार्च प्रथम पखवाड़ा से अप्रैल प्रथम पखवाड़ा तक।
3) बीज दर, दूरी व बुवाई (लाइन ब आई सवोत्ति)
बीज दर:- खरीफ: 15–20 किग्रा/हेक्टेयर
- जायद/ग्रीष्म: 25–30 किग्रा/हेक्टेयर
- खरीफ: कतार 30–45 सेमी, पौधा 10 सेमी
- ग्रीष्म: कतार 30 सेमी, पौधा 10 सेमी
4) बीज उपचार + राइजोबियम (बहुत जरूरी)
बीज उपचार (बीज/मिट्टी जमनत र ग सेबिाव):- Trichoderma 5–10 ग्राम/किलो बीज
- या Thiram + Carbendazim उपचार
- फफूंदनाशी उपचार के बाद Rhizobium कल्चर से बीज उपचार जरूरी।
5) खाद व उर्वरक प्रबंधन (Soil test क प्राथमिकता)
- उड़द/मूंग में सामान्य अिुशंसा: नाइट्रोजन: 15–20 किग्रा/हेक्टेयर
- फॉस्फोरस: 40 किग्रा/हेक्टेयर
- DAP ~100 किग्रा/हेक्टेयर
- जिप्सम 200 किग्रा/हेक्टेयर लाभकारी
- उर्वरक बीज से 2–3 सेमी नीचे दें
6) सिंचाई प्रबंधन (Irrigation)
खरीफ:- सामान्य वर्षा में अतिरिक्त सिंचाई नहीं
- वर्षा कमी पर फलियाँ बनते समय 1 सिंचाई
- 3–4 सिंचाई
- पहली 20–25 दिन बाद
- फूल व दाना भराव अवस्था पर जरूरी
7) खरपतवार प्रबंधन
- पहले 20–30 दिन महत्वपूर्ण
- Pendimethalin / Alachlor उपयोग
- 20–25 DAS पर निराई
- जरूरत हो तो 40–45 DAS पर दूसरी
8) प्रमुख रोग-कीट
- पीला मोजेक (YMV)
- Cercospora leaf spot
- Anthracnose
- Powdery mildew
- सफेद मक्खी नियंत्रण जरूरी
9) कटाई व भंडारण
- फलियाँ पकने पर चरणबद्ध कटाई
- दाना अच्छी तरह सुखाकर भंडारण
फसल की उपज भूमि, जलवायु, प्रबंधन, उर्वरक व बीज गुणवत्ता पर निर्भर करती है — परिणामों में अंतर संभव।

